Friday, 23 April 2010

चाहत (मुक्तक)


आज के ख़ास मौके पर .........................
तुम्हारे साथ मेरी रोज , प्यारी बात होती है ,
नया- सा दिन ये होता है , सुहानी रात होती है /
पपीहा या बनूँ चातक , तुम्हारे प्यार की खातिर ,
तुम्हारी सुरमई आँखों से , जो बरसात होती है //
तुम्हारे बिना मेरे शब्द अर्थहीन ........................
तुम्हारे जुल्फ के बादल , हमें हैरान करते हैं ,
गरजते हैं , चमकते हैं , बहुत परेशान करते हैं /
सदा परेशान होने के लिए , मैं छेड़ता इनको ,
हमारे शब्द में सुन्दर सजीले प्राण भरते हैं //
पहचान ...................
समंदर प्यार का अन्दर भरा है , मानते हो तुम ,
हमारे इश्क के जूनून को , पहचानते हो तुम /
तुमसे दूर हो ज़िंदा रहूँ , ये हो नहीं सकता ,
सभी हैं जानते ये बात , खुद भी जानते हो तुम //
दीवानों के नाम ................
लगा दो आग पानी में , जवानी उसको कहते हैं ,
कभी ना ख़त्म हो जो बात , कहानी उसको कहते हैं /
कबीरा , सूर औ' तुलसी , सभी पागल दीवाने थे ,
पीया जिसने गरल सुन लो , दीवानी उसको कहते हैं //

Friday, 16 April 2010

कामना

मैं अंधेरों को भी चीर आगे बढूँ ,
तुम किरण बन कहीं पर मिलो तो सही /
मैं तो काँटों को लूँगा हृदय से लगा ,
तुम सुमन बन कहीं पर खिलो तो सही //
तुमसे मिलने की इच्छा , बड़ी है मगर ,
मुझको प्यारी है प्रिये , विरह की डगर
फूँक डालूँगा मैं कामना का नगर ,
तुम हवन बन कहीं पर जलो तो सही//
मंजिलें मेरे आगे परेशान न हों ,
राह मेरी सफलता पे हैरान न हों ,
ना बचे लक्ष्य जो कुछ भी अनजान हो ,
साथ तुम एक कदम तक चलो तो सही //
रात धरती की गोदी में शबनम पली ,
औ' सुबह होते देखा तो लेने चली ,
एक झोंका पवन का ले ले जी मेरी ,
तुम पवन बन के झोंका चलो तो सही //

माँ

प्यारी माँ मुझको तेरी दुआ चाहिए ,
तेरे आँचल की ठंडी हवा चाहिए /
लोरी गा गा के मुझको सुलाती है तू ,
मुस्कुरा के सबेरे जगाती है तू ,
मुझको इसके सिवा और क्या चाहिए ?
तेरी ममता के साए में फूलूँ फलूँ ,
थाम कर तेरी ऊँगली मैं बढ़ता रहूँ ,
आसरा बस तेरे प्यार का चाहिए /
तेरी पूजा से दुनिया में इज्जत मेरी ,
तेरे पाँवों के नीचे है जन्नत मेरी ,
उम्र भर सर पे साया तेरा चाहिए /
अन्ना खाया , पीया जल तुम्हारा सदा ,
प्यार पाया जगत में तुम्हारा सदा ,
क़र्ज़ तेरा उतारूंये भावना चाहिए /
तेरे दुश्मन मिटें ये प्राण है मेरा ,
तू सदा जगमगाए ये मन है मेरा ,
तेरी खुशियाँ बढ़ें , बस यही चाहिए /
शब्द सागर से मोती चुराता रहूँ ,
आप सुनते रहें , मैं सुनाता रहूँ ,
ताली बजती रहे फिर तो क्या चाहिए ?